~तनहाई~

तनहा था तनहाई थी ,बात लबों तक ना आईं थी
आज पूछे सब तेरे लिए ,पूछा ना होगा तेरी तनहाई
तू मंद मंद मुस्कान बिखरे ,छिपाता रहा अपनी तनहाई 
 सरा जग सुना हुआ 


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