"चाय"
शाही गुलाब सी हो "तुम"
लबों पे नबाब सी हो "तुम"।
"तुम" नाजुक युवती सी हो
"तुम" भूल जाती हो दर्द टूटने
का औरों का दर्द भूलती हो "तुम"।
काली हो "तुम " पर कितनी प्यारी हो "तुम"
गर्म प्याले में सरबती मधुर मोहक हो "तुम"
हर वक्त की प्यास हो "तुम"
हर मौसम में खास हो "तुम"
चुस्कियों में "चाय"हो "तुम"हर मन में समाई हो "तुम" बस एक प्याली "चाय" हो ।
~Deepshikha Jha
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