संदेश

~यारी~

अल्फ* ए यारी वफाएं सारी ये दुनियां दारी फ़िज़ूल है इल्म* तेरा कबूल किया अंजाने  तुझे दूर किया ए अजनबी तुझे क्यों फ़िर मंजूर किया    तेरी आदा निराली , इल्लत* इलान* है   तेरी सूरत ए ना जाना ,तेरे ईमान याराना   तेरी मायूसी* ही उल्फत* है, खुशियों को तेरी जरूरत है तू अब्द* नहीं किसी सुंदरता का तेरा अ‌‌त्र* मन ही प्रभात है ,आरा * ना कोई सच्चे मन का , दर्पण तेरा विश्वास हैं    तू रख वक़्त पर ऐतबार जरा , खुदा एक पाक हैं            1.भेट 2 ज्ञान 3.कमी 4.बताना 5.उदासी 6. परेशानी 7.दास  8.सुगन्ध  9.सजावट   ~Deepshikha Jha ✍️🤗  M

~ तेरा पता~

कितने मिले इस जहां पर, कितने मिले आसमान पर , तेरा पता ढूंढू कहां ,तू हैं किस मकाम पर  अपना पता सब भूलकर , ढूढ़ती तुझे ए बेखबर रातों को यू बेसब्र ,दिन कि कहां मुझ को हैं फीकर सुबह से लेकर शाम तक ढूंढ़ती तुझो ये नज़र कहां छुपा है बेखबर बनाकर मुझे अपना हमसफ़र कहां छुपा है बेखबर  बनकर यूं अनजान तू ,बैठा है आराम से तुझको नहीं कोई खबर कहां छुपा है बेखबर ....! तेरा पता ढूंढू कहां ,तू हैं किस मकाम पर                                                                                         ~ Deepshikha Jha                                  

~ माँ~

                    कैसे  कहूं  क्या  हो  "तुम"            नदी की रेत के साथ पवन की बहती            हुई धारा  हो"तुम ",सागर में जो।  पाप              निथर जाएं  ऐस  किनारा  हो "तुम"।                    कैसे   कहूं   क्या  हो  "तुम"      अनजान गली के मोड़ पर जो मिल जाएं      वहीं  सहारा हो "तुम", आंधियारों में मिली      " दीए "की रोशनी जैसी उजाला हो "तुम"               कैसे   कहूं   क्या हो  "तुम"        सर्दियों में  चाय की प्याली सी प्यारी हो        "तुम",बड़ी न्यारी हो "तुम", बगों में              खिले  फूलों कि क्यारी हो "तुम" ...

~ मजदूरों के महार्थी~

"सोनू" के वेश में सोना आया है, धरती पर गौरव का "सूद"चुकाया है कहते हैं "सोना" तपकर कुन्दन का रूप लेलेता हैं "सोनू" तपकर चंदन बना , जिसने अपना खुशबू  सरेआम बिखेरा है । मजदूरों के "सारथी" , "अभिनय" के महारथी , मन हैं जिनका "भारती" ,वो "सोनू सूद" के रूप में  एक नया सबेरा है                         ~ Deepshikha Jha ✍️

~तेरा चेहरा~

चित्र
मन देखता ये मेरा तेरा चेहरा तेरा चेहरा  आंखों पे दिल का पहरा तेरा चेहरा तेरा चेहरा  मन में बसी जो तेरी मूरत लगाव ,गहरा गहरा  तेरा चेहरा तेरा चेहरा  तू ही तू हर तरफ है ना आए कुछ नज़र में , कहते लोग पागल ना आए कुछ समझ में  मन ये तुझ पे ठहरा , ठहरा ,तेरा चेहरा तेरा चेहरा। मन में बसाया तुझको भाए ना कोई मुझको  दर ये मेरे मन का घर जो तेरा मेरा तेरा चेहरा तेरा चेहरा ~Deepshikha Jha ✍️

A Relation

A Relation is not available for passing time and enjoying own self .In any relation involved two persons if one said is true or other said show fek that's end of one skeep our way but emotionally attached person who face lot of problems .                              I am not tells about the girl friend or boy friend I am saying all the modden relationship which  you has do on social media and working place even our society and our family member's .                        Some time we're thought -"a little enjoyment dos"t metter but sometime this revolving hole life . We Unable to repair it . I know we are limitless but don't cross our limit  .            ~Deepshikha jha..

~ ख्व़ाहिशें~

*चांद ,तारों का अक्सर समा नहीं मिलता हर किसीको       मुकम्मल जहां नहीं मिलता। *मखमली बिस्तर किसीको,किसीको धूपमे भी   छाऊं नहीं मिलता।   धरती से कभी आसमां नहीं मिलता ,हर    किसीको मुकम्मल जहां नहीं मिलता। *हुनर सबमें हैं किसीको मौका,किसीको   मुकाम नही मिलता ।  नींद में कभी सपनों को उड़ान नहीं मिलता,  हर किसीको मुकम्मल जहां नहीं मिलता। *मस्ले हैं सभी के अपने, दर्द से जख्मों को   आराम नहीं मिलता।  सूरज से कभी चांद नहीं मिलता हर किसीको    मुकम्मल जहां नहीं मिलता।                        ~ Deepshikha Jha