संदेश

एक चांद है फलक पर देखती मैं भी हूं  देखतें तुम भी हो"तुम मुझ से जुदा कैसे हो"। मंजिल अलग है एक राह अकेली है उन्हीं  राहों  से गुजरती मैं भी हूं गुजरतें तुम भी हो "तुम मुझ से जुदा कैसे हो"। एक आशियाना है खुदा का जहां पर मैं भी हूं वहां पर तुम भी हो " तुम मुझ से जुदा कैसे हो"।                                                  ~Deepshikha Jha

#मै#

कोई अपना कहां मिला इस जहां में , मै भटकती रही हूं आसमां में। सब अपना - अपना कह जाते हैं हम यूं ही तन्हा रह जाते हैं। मुझसे नहीं "मैं" से जोड़ते हैं नता "मै" मिले,जहां फिर कुछ नहीं उन्हें भाता । यारी, दुनियां - दारी, मां - बाप सिर्फ नाम के शोहरत - रुतबा है काम के ।                                                      Deepshikha Jha

~तनहाई~

तनहा था तनहाई थी ,बात लबों तक ना आईं थी आज पूछे सब तेरे लिए ,पूछा ना होगा तेरी तनहाई तू मंद मंद मुस्कान बिखरे ,छिपाता रहा अपनी तनहाई   सरा जग सुना हुआ 

*सुशांत*

मन "आशांत" ,नाम " सुशांत" था तू भीड़ में "एकांत" था गांव "पूर्णिया" ,"पटना" बासी ,निर्मल गंगा तेरे "राख"की प्यासी । "महानगर" ने तुमको "मोहा", चमक - दमक ने तुमको "तोड़ा", तन्हा होकर "जीवन"से फ़िर तू अपना मुंह "मोड़ा"। "जीवन" का "सुख" छोड़ गया, सब "नाता- रिश्ता"तोड़ गया, अपनों को "तन्हा"  छोड़ गया ,चाहने वालों का "दिल" तोड़ गया। ज़िक्र करू कैसे तेरे " श्र्वन" का आंख से "टप-टप" छलके "मोती", एक "बेजुबान" संसार  में छोड़ गया।                               ~ Deepshikha Jha

अमिताभ

नभ में तैरता एक "सितारा" हैं आप । हर आंख में टीम - टीम करता "तारा" है आप। एक चांद "आसमां" में एक चांद हैं "जमी" पर। "सूरज" सा तेज़ बिखेरता "मुस्कान" है यही पर । नदियों की लहरें उठकर देती "सलामी" जिसको  "पवन" के झोंके अक्सर जुल्फें सबरें "उनके"। पंझी ,बहारें आकर धुन सुनती "जिनको", देखकर "विनम्र" उनको झुक जाती फूलों की डाली। मंदिर में बसी "मूरत" लगती हैं उनकी सूरत । जो मिट ना सके वो "निशान" है "विनम्रता" की पहचान है "नम्र" रहकर जोड़े हाथ सभी को  इतने " प्रतिभावान" है " अमिताभ" कहते लोग  उन्हें वहीं " ख्यतिवान" हैं।                              ~ Deepshikha Jha  

*God Father's*

The day of "Fathers"    The "Father"  like "heaven".   His  twinkling  "eyes"  And  wrinkling Head defines "overtakes".              A smile always Covers his "Face" . Holds hands in his "hand"  just like shelter over the head. His "Bertha" on the "Earth" which like "Godfathers" (brambhas) built us men.                                     ~Deepshikha  Jha
मिले हैं आज तो कल की फ़ीकर मत करना, कल मिलू ना मीलू इसका ज़िक्र भी मत करना । याद आऊं तो मुस्कुरा देना,रो कर कहीं भूल ना जाना। तस्वीर देख "गिला" ना करना, ज़िन्दगी लंबी नहीं बड़ी थी ये याद रखना। मेरी "शखसीयत" ना मिटा पाओगें,चाहें जितना जोर लगाओगे। मैं मन से "जिया", मन से "मरा"  और कितना आजमाओगें ,मिटाना सकोगें नाम मेरा शांत मन में एक "सुशांत"पाओगे । ~Deepshikha jha