संदेश

आज़ाद हूँ मैं

तितली सी। आज़ाद  हूँ मैं , अपने पिता की सर ताज हूँ मैं। क्यों बांधो तुम मुझे इन बेड़ियों में, क्या छुपाने वाली कोई राज़ हूँ मैं। बिटिया - बिटिया कहकर समाज ने पायल बांध दिया पैरो में , इज्जत  हूँ परिवार का नथ बांध दिया नाकों में। बेड़ियों में जकड़ी हुई, बेटी ,बहु , घर की लाज हूँ मैं । दहलीज के अंदर आज़ाद हूँ मैं, उड़ाने फिर रूक जाती हैं मेरी सब रिश्तों की बुनियाद हूँ मैं , ये स्त्री रूपी बंधनों से कब  हुई आज़ाद हूँ मैं  , पर्दों में लिपटी हुई , संभालती पूर्ण रस्मों  रिबाज़ हूँ मैं , मर्यादाओं का दीवार हूँ मैं ,  महिला हूँ मन की रानी और मन में ही आज़ाद  हूँ मैं ।                                              ~दीपशिखा झा✍️

* मन के रिश्ते*

*खून का रिश्ता तो सब को निभाना पड़ता हैं।   कभी वक्त पर रिश्ता बना कर तो देखो ।       *अमीर से यारी दुनियां करती हैं।         गरीब को दोस्त बनाकर तो देखों।     *जन्म से मिले रिश्ते सभी निभाते है।    जीवन भर का साथ निभा कर तो देखो।       *जरूरत पड़ने पर पुकारा करते हैं।     जरूरत के समय काम आकर तो देखो।             *जिंदगी एक संघर्ष हैं ।              इस संघर्ष में मुस्कुरा कर तो देखो ।
बिन कहें वो पढ़ लेती है मुझे , मेरे हिस्से का दर्द भी सह लेती हैं। हर बुरे साएं से बचाती हैं मुझे, अच्छाई का पाठ पढ़ाती हैं। परछाई सी साथ निभाती हैं ,  हर ज़ख़्म पे मरहम लगाती हैं। मेरी खुशी के लिए लड़ जाति है, अपने आंचल में गम छुपाती है । जैसे समंदर में मोती की तलाश हो, सभी के लिए तुम इतनी ही ख़ास हो  "माँ" तुम ऐसी एक "एहसास" हो , जिसकी सागर को भी प्यास हो ।                         ~Deepshikha Jha ✍️      

क्या आप जानतें हैं झुग्गी बस्तियों की कहानी

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अक्सर शहरी शोर शारावें में हम कुछ दर्द से भरी शोर को अनदेखा कर देते हैं , वो छोटे - छोटे हाथों में फूल लेकर गाड़ी के पीछे - पिछे भागते दिखते हैं । पर हम तक उनकी प्रिस्थिति के शोर नहीं पहुंच पाती हैं। और कभी सुनाई पर भी जाएं तो हम so called society में रहने वाले  high class लोग हैं। खिड़कियों के कांच बंद कर लिया करते हैं।                फरवरी माह की पहली तारीख को मैं मेरी बहन सुबह की सैर के लिए निकले,  पार्क से थोड़ी दूर पहले ही एक EHCC प्राइवेट अस्पताल है। जो कि बोहोत ही "जाना - माना"और मेहगा हैं। अक्सर वहां बड़ी - बड़ी गाड़ी में बैठ कर बड़े लोग ही इलाज़ करवाने आया करते है। वहीं झुग्गी झोपड़ी बनाकर कुछ लोग भी रहा करते हैं ।                    इतनी बड़ी और "स्पेशली हार्ट सर्जरी" वाले अस्पताल में कोई बड़े स्तर के नेता और अभिनेता न आतें हो,ऐसा असंभव है । और जेएलएन मार्ग जो रास्ता एयरपोर्ट के लिए जाति है, वही से बड़ी - बड़ी  शख्सियत वाले लोग निकलते हैं , पर उनकी सहायता करने अगर कभी कोई आ...
ना जाने ये क्या होगया , तुम मिले इस तरह की, हम से हमीं खोगाया । ज़माने ढूंढता हूं तुम्हें, ना मैं, मैं रहा न तुम रहे, "हम"सफ़र शुरू हो गया। यादों का समा बनता रहा, सपनो का मौसम ढलता रहा, तुम में मैं जलता रहा। तन्हायों की ख़बर नहीं है, हर तरफ़ मुस्कुराते चेहरे है, गम की घुप छाया में खुशियों के सबेरे है।                  ~दीपशिखा झा

*मिथिला संस्कृति*

माँ जानकी की भूमि, गोतम बुद्ध की निशान बाबा वेदनाथ बिराजे, कोषी, बालन, गंडक गंगा नदी का पानी । मिथिला धाम के हम मैथिल मधुर है बोली - वाणी कवि विद्यापति की गाथा, मिथिलाक अमर निशानी। खान - पान की मिसालें,  आदर स्वभाव वाले  मैथिली है जिनकी बोली, मीठी जैसे रंगोली । इतिहास की मिसालें, पर्वत गर्व वाले  मिथिला है हम मैथिल है ।                             ~दीपशिखा झा

"सामाजिक प्रश्न"

जन्म दिया "तूने* इस धरती पर ये तेरा किया "अपराध"* है लड़की होना अभिशाप है । खुशियां देखा ना देखी बचपन सुना पड़ा है सारा जीवन  दर्द ही दर्द भरा मेरा दामन "तूने" दिया ये श्राप है लड़की होना अभिशाप है। इंसानी रूप में गूड़िया हैं बनाया ,कौन अपना कौन पराया खिलौना समझे पूरा संसार है लड़की होना अभिशाप है। मासूम किशोरी बिलखती रही एकबार फिर मर्द रूपी बनी भेडिये की शिकार है इसधरती पर स्त्री रूपी जन्म लेना "अपराध" है ,लड़की होना अभिशाप है।                             ~Deepshikha Jha *भगवान *गलती